भ्रष्टाचार पर ‘बाबा’ का वज्रपात: हमीरपुर में सहायक आयुक्त समेत 3 अधिकारी सस्पेंड, अवैध वसूली के खेल का हुआ पर्दाफाश

हमीरपुर जिला उद्योग केंद्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई। सहायक आयुक्त समेत 3 अधिकारी सस्पेंड। पढ़ें पूरी खबर और जानें कैसे हुई अवैध वसूली का भंडाफोड़।

UP News: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी आदित्यनाथ सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान को और तेज कर चुकी है। शासन की मंशा साफ है- जनता के काम में अड़ंगा डालने वाले और रिश्वतखोरी में लिप्त अधिकारियों के लिए व्यवस्था में कोई जगह नहीं है। इसी कड़ी में सोमवार को हमीरपुर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे तीन बड़े अधिकारियों पर गाज गिरी है। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, हमीरपुर जिला उद्योग कार्यालय में तैनात सहायक आयुक्त और प्रबंधकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है।

इन अधिकारियों पर गिरी गाज: कौन-कौन हुआ सस्पेंड?

हमीरपुर जिला उद्योग केंद्र में भ्रष्टाचार की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। जांच के बाद जिन तीन अधिकारियों को दोषी पाया गया और निलंबित किया गया, उनके नाम निम्नलिखित हैं:

  • रवि वर्मा: सहायक आयुक्त उद्योग/प्रभारी उपायुक्त उद्योग।
  • संतोष राव: सहायक प्रबंधक।
  • मिलन कुमार: जिला प्रबंधक।

इन अधिकारियों पर आरोप है कि वे सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से फाइल आगे बढ़ाने और सब्सिडी पास कराने के बदले अवैध रूप से धन की उगाही कर रहे थे।

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जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: ऑनलाइन आवेदन और सब्सिडी के नाम पर ‘वसूली’

योगी सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचे, इसके लिए प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया गया है। लेकिन, हमीरपुर में इन अधिकारियों ने डिजिटल व्यवस्था में भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लिया था। कैसे हुआ भंडाफोड़? लाभार्थियों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ऑनलाइन आवेदन करने और फाइलों के निस्तारण (Disposal) के लिए उनसे पैसों की मांग की जा रही है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने एक दो-सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति में हमीरपुर के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और अपर जिलाधिकारी (ADM) शामिल थे। जांच समिति ने गहराई से पड़ताल की और पाया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में सब्सिडी दिलाने और पत्रावली निस्तारण के नाम पर इन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से अवैध धन उगाही की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार के ठोस साक्ष्य मिलने के बाद समिति ने शासन को कठोर कार्रवाई की सिफारिश की।

जीरो टॉलरेंस की नीति: भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश का संकल्प

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Adityanath) अक्सर अपने भाषणों में दोहराते हैं कि “भ्रष्ट अधिकारियों की जगह जेल में है।” हमीरपुर की यह कार्रवाई इसी संकल्प को दोहराती है। डीआईपीआर के मुताबिक, न केवल इन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, बल्कि इनके खिलाफ कठोर अनुशासनिक कार्यवाही के भी आदेश दिए गए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य अन्य अधिकारियों को कड़ा संदेश देना है कि यदि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार पाया गया, तो बख्शा नहीं जाएगा। उद्योग विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में, जहां युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए मदद दी जाती है, वहां इस तरह की वसूली ने सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाया था, जिसे सुधारने के लिए यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जरूरी थी।

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