सावधान! शेयर बाजार निवेशकों को कंगाल बना रहे हैं SEBI के नाम पर आए ये ‘फर्जी नोटिस’, भूलकर भी न करें ये गलती
शेयर बाजार निवेशकों सावधान! SEBI ने फर्जी STT नोटिस को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। जानें कैसे जालसाज सेबी के नाम पर चूना लगा रहे हैं और खुद को कैसे सुरक्षित रखें।
SEBI Alert: शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए एक बेहद जरूरी चेतावनी सामने आई है। अगर आपके पास भी SEBI (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) के लेटरहेड वाला कोई ऐसा नोटिस आया है जिसमें Securities Transaction Tax (STT) के भुगतान की मांग की गई है, तो रुक जाइए! आप एक बड़ी जालसाजी का शिकार हो सकते हैं। बाजार नियामक सेबी ने निवेशकों को सतर्क करते हुए कहा है कि धोखेबाज अब रेगुलेटर के नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल कर लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं।
सेबी के लेटरहेड और मुहर का गलत इस्तेमाल: कैसे हो रहा है खेल?
हाल ही में सेबी के संज्ञान में आया है कि कुछ शातिर जालसाज वित्त अधिनियम, 2004 का हवाला देकर निवेशकों को फर्जी नोटिस भेज रहे हैं। इन नोटिसों में बकाया STT राशि जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये नोटिस देखने में बिल्कुल असली लगते हैं क्योंकि इनमें सेबी के आधिकारिक लोगो (Logo), मुहर और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया जा रहा है। सेबी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि:

- नियामक कभी भी सीधे निवेशकों को STT जमा करने के लिए नोटिस जारी नहीं करता है।
- STT का संकलन और भुगतान स्टॉक एक्सचेंजों और ब्रोकर्स के माध्यम से होता है, न कि सेबी के जरिए।
- सेबी इस मामले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर किसी भी तरह का टैक्स कलेक्शन समन्वय नहीं करता है।
जालसाज निवेशकों को डराकर उन्हें एक विशिष्ट बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। भोले-भाले निवेशक कानूनी कार्रवाई के डर से पैसे भेज देते हैं और वित्तीय नुकसान का शिकार हो जाते हैं।
‘जीरो रिस्क’ और ‘प्रॉफिट शेयरिंग’ का झांसा: एक और बड़ा स्कैम
केवल फर्जी नोटिस ही नहीं, बल्कि सेबी ने एक और ट्रेंड को लेकर आगाह किया है। कुछ ठग खुद को ‘फंड मैनेजर’ या ‘खाता संचालक’ बताकर सोशल मीडिया के जरिए निवेशकों से संपर्क करते हैं। वे निवेशकों को जोखिम-मुक्त लाभ (Risk-free Profit) का लालच देते हैं। इन ठगों का काम करने का तरीका कुछ ऐसा है:
- वे आपकी पोर्टफोलियो या ट्रेडिंग अकाउंट की जानकारी मांगते हैं।
- वे दावा करते हैं कि वे आपके खाते को मैनेज करेंगे और मुनाफे में हिस्सा लेंगे।
- कड़वा सच: अगर मुनाफा होता है तो वे हिस्सा मांगते हैं, लेकिन अगर घाटा होता है (जो अक्सर होता है), तो पूरा बोझ निवेशक को ही उठाना पड़ता है। सेबी ने साफ किया है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने ट्रेडिंग अकाउंट का एक्सेस देना भारी पड़ सकता है।
बजट 2026-27 और STT में बदलाव: क्या है असली हकीकत?
जालसाज अक्सर खबरों का फायदा उठाकर लोगों को गुमराह करते हैं। हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में वायदा और विकल्प (F&O) सेगमेंट पर STT बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य छोटे निवेशकों को अत्यधिक सट्टेबाजी से बचाना है। नया प्रस्तावित STT ढांचा: | ट्रांजैक्शन प्रकार | पुराना रेट | नया प्रस्तावित रेट | | :— | :— | :— | | वायदा अनुबंध (Futures) | 0.02% | 0.05% | | विकल्प प्रीमियम (Options) | 0.1% | 0.15% | | विकल्प का प्रयोग (Exercise of Options) | 0.125% | 0.15% | चूंकि STT की चर्चा बाजार में गर्म है, ठग इसी का फायदा उठाकर निवेशकों को बकाया टैक्स के नाम पर डरा रहे हैं। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि बढ़ा हुआ टैक्स आपके ब्रोकर के माध्यम से ऑटोमैटिक कटेगा, इसके लिए सेबी आपको अलग से चिट्ठी नहीं भेजेगा।
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निवेशकों के लिए सुरक्षा टिप्स: कैसे पहचानें फर्जी नोटिस?
- प्रामाणिकता की जांच: सेबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किसी भी नोटिस या सर्कुलर को क्रॉस-चेक करें।
- बैंक विवरण: सेबी कभी भी किसी निजी व्यक्ति या अज्ञात खाते में पैसे जमा करने को नहीं कहता।
- गोपनीयता: अपना ट्रेडिंग आईडी, पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
- रिपोर्ट करें: यदि आपको ऐसा कोई संदिग्ध पत्र मिलता है, तो तुरंत सेबी की ‘SCORES’ पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।



