Rewa के मध्येपुर गांव में हथियारों के बल पर सरकारी रास्ते पर कब्जा,गांव में दहशत का माहौल

रीवा(Rewa) जिले के ग्राम मध्येपुर(Madhyepur) में सरकारी जमीन, रास्ता और हैंडपंप पर दबंगों के कब्जे का गंभीर मामला। हथियारों के बल पर रास्ता बंद, गांव पानी को तरसा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

रीवा(Rewa) जिले के हुजूर(Huzur) तहसील अंतर्गत ग्राम मध्येपुर(Madhyepur) से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दबंगों द्वारा शासकीय भूमि, शासकीय रास्ता और सरकारी हैंडपंप पर जबरन कब्जा कर लिए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि ग्रामीणों के पीने के पानी और आवागमन के मूल अधिकार भी छीन लिए गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के बीच से गुजरने वाला एक आम शासकीय रास्ता, जो वर्षों से उपयोग में था और जिस पर सरकारी हैंडपंप स्थापित था, उसे जबरन खेत में मिला दिया गया। आरोप है कि यह अवैध कब्जा भेटेलाल यादव, अनुसुईया यादव और रामकिशोर यादव द्वारा किया गया, जिनके पिता का नाम पंछी यादव बताया जा रहा है।

हथियारों और जेसीबी के बल पर कब्जा
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपितों ने लाठी, डंडा और तलवार से लैस लोगों को बुलाकर गांव में दहशत फैलाई और विरोध करने वाले ग्रामीणों को धमकाया। इतना ही नहीं, जेसीबी मशीन लगाकर शासकीय भूमि से जुड़े रास्ते को समतल कर खेत का रूप दे दिया गया। देखते ही देखते वह रास्ता, जिससे पूरा गांव गुजरता था, पूरी तरह से बंद हो गया।
“इस पूरे मामले को लेकर हमारे आधिकारिक चैनल Nation Tv ने कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचे ग्रामीणों से बात की, जिसका वीडियो नीचे देखा जा सकता है।”

हैंडपंप भी तारबंदी में कैद, पानी को तरसा गांव
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस स्थान पर अवैध कब्जा किया गया, वहीं पर गांव का एकमात्र शासकीय हैंडपंप भी स्थित था। अब उस हैंडपंप के चारों ओर तारबंदी और पत्थर की मेड़ बना दी गई है, जिससे ग्रामीणों का वहां तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया है।
गर्मी के इस मौसम में गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे पीने के पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।

राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित भूमि पहले शासकीय खसरा नंबर में दर्ज थी, लेकिन बाद में यादव परिवार ने पटवारी से कथित साठगांठ कर उस जमीन को अपने नाम पर दर्ज करा लिया। यह आरोप प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस, सरपंच और स्थानीय अधिकारियों से भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि पूर्व में हुई सुनवाई में भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

कलेक्टर से न्याय की गुहार

कलेक्टर से न्याय की गुहार
अब ग्रामवासी मजबूर होकर रीवा(Rewa) कलेक्टर के समक्ष आवेदन देकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि शासकीय भूमि से अवैध कब्जा तुरंत हटाया जाए
शासकीय रास्ता पुनः खुलवाया जाए,सरकारी हैंडपंप को आम जनता के लिए मुक्त किया जाए और दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक पुलिस कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो गांव में बड़ा सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है।

हैंडपंप भी तारबंदी में कैद

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी अवैध कार्रवाई के बावजूद प्रशासन अब तक मौन क्यों है? क्या शासकीय भूमि पर कब्जा करना अब इतना आसान हो गया है? और क्या आम ग्रामीणों की आवाज दबंगों और प्रभावशाली लोगों के सामने बेअसर हो चुकी है?
यह मामला न केवल ग्राम मध्येपुर(Madhyepur) का है, बल्कि यह पूरे जिले में शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
Nation Tv की टीम ने रीवा कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचे ग्राम मध्येपुर(Madhyepur) के ग्रामीणों से प्रत्यक्ष बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि शासकीय रास्ता बंद होने से न केवल आवागमन प्रभावित हुआ है, बल्कि गांव का एकमात्र शासकीय हैंडपंप भी तारबंदी के भीतर चला गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।”

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