कर्तव्य पथ पर गरजे भारत के ‘7 शूल’: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार दिखेगी स्वदेशी सैन्य महाशक्ति

26 जनवरी 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर दिखेंगे भारत के 7 घातक स्वदेशी हथियार। ब्रह्मोस, आकाश, ATAGS, ड्रोन शक्ति और रोबोटिक म्यूल्स की पूरी जानकारी पढ़ें।

Republic Day 2026 Indian Military Power: 26 जनवरी 2026 को होने वाली 77वीं गणतंत्र दिवस परेड इस बार इतिहास रचने जा रही है। यह परेड इसलिए खास है क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार आयोजित हो रही है, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी रणनीतिक और तकनीकी ताकत का प्रदर्शन किया था। इस बार कर्तव्य पथ पर भारत अपने वो ‘7 शूल’ प्रदर्शित करेगा, जिन्होंने दुश्मन की सैन्य क्षमताओं को गहरी चोट पहुंचाई। परेड की थीम ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर आधारित है, जो भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को दुनिया के सामने रखेगी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली परेड, बदली युद्ध रणनीति

गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में पहली बार “Phased Battle Array Formation” देखने को मिलेगी। इसका मतलब है- युद्ध के दौरान हथियारों का इस्तेमाल जिस क्रम में किया जाता है, वही क्रम परेड में भी दिखेगा। यह साफ संकेत है कि भारतीय सेना अब भविष्य की लड़ाइयों के लिए पूरी तरह तैयार है। इस परेड में दिखाए जाने वाले अधिकतर हथियार Make in India के तहत विकसित किए गए हैं और ऑपरेशन सिंदूर में अपनी प्रभावशीलता साबित कर चुके हैं।

Republic Day 2026 Indian Military Power
Republic Day 2026 Indian Military Power

ब्रह्मोस से आकाश तक – भारत के 7 घातक शूल

ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल

भारत-रूस की संयुक्त परियोजना ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है।

  • रेंज: 300 किमी+
  • स्पीड: मैक 3 से अधिक
  • खासियत: Fire & Forget, रैमजेट इंजन
    ऑपरेशन सिंदूर में इसने पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस को सटीक निशाने से तबाह किया।

ATAGS (Advanced Towed Artillery Gun System)

155mm/52 कैलिबर की यह तोप भारत की स्वदेशी आर्टिलरी शक्ति का प्रतीक है।

  • रेंज: 48 किमी
  • खासियत: हर इलाके में तैनाती, पोखरण में सफल ट्रायल
    अगले डेढ़ साल में सेना को 1500 ATAGS मिलने की योजना है।

MR-SAM (Medium Range Surface to Air Missile)

यह मिसाइल दुश्मन के हवाई हमलों के खिलाफ भारत की ढाल है।

  • वर्टिकल लॉन्च
  • एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला
    ऑपरेशन सिंदूर में इसने सैकड़ों हवाई खतरों को नाकाम किया।

आकाश मिसाइल सिस्टम

पूरी तरह स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम।

  • रेंज: 27–30 किमी
  • विमान, ड्रोन और मिसाइल को एक साथ निशाना
    आकाश तीर रडार सिस्टम के साथ काम करता है।

ड्रोन युद्ध और रोबोटिक भविष्य की झलक

ड्रोन शक्ति – ईगल प्रहार

यह सिस्टम ड्रोन कंट्रोल, रिपेयर और स्वार्म ऑपरेशन में सक्षम है।

  • मौके पर ड्रोन रिपेयर
  • सर्विलांस और काउंटर-ड्रोन क्षमता
    यह दिखाता है कि भारतीय सेना ड्रोन वॉरफेयर में तेजी से आगे बढ़ रही है।

दिव्यास्त्र और शक्तिबाण रेजीमेंट

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना में बड़ा पुनर्गठन हुआ है।

  • दिव्यास्त्र बैटरी: एडवांस्ड ड्रोन-मिसाइल यूनिट
  • शक्तिबाण रेजीमेंट: स्वार्म ड्रोन और लॉयटरिंग मुनिशन से लैस
    हर इन्फैंट्री बटालियन में अब ड्रोन प्लाटून होगा।

रोबोटिक म्यूल्स

कुत्ते जैसे दिखने वाले ये रोबोट सैनिकों के लिए वरदान हैं।

  • पहाड़ी इलाकों में सामान ढोने में सक्षम
  • दुश्मन की पहचान और निगरानी
    ये भविष्य की लड़ाइयों में सैनिकों की जान बचाएंगे।

इसे भी पढें: 25 साल बाद बड़ा फैसला: बेंगलुरु नगर निगम चुनाव EVM से नहीं, बैलेट पेपर से होंगे मतदान

फ्लाईपास्ट और सांस्कृतिक शक्ति प्रदर्शन

परेड में 29 लड़ाकू विमानों का फ्लाईपास्ट, भैरव कमांडो, और भव्य सांस्कृतिक टेबलॉ भी आकर्षण का केंद्र होंगे। यह परेड सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

Related Articles

Back to top button