महाशिवरात्रि पर संगम में ‘शिवमय’ हुई दुनिया: 22 करोड़ श्रद्धालुओं ने रचा इतिहास, प्रयागराज माघ मेले में टूटा दशकों का रिकॉर्ड!

प्रयागराज माघ मेला 2026 के अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर संगम में उमड़ा जनसैलाब! 22 करोड़ श्रद्धालुओं ने बनाया नया रिकॉर्ड। पढ़ें पूरी रिपोर्ट और प्रशासन की तैयारी।

Mahashivratri Sangam Snan 2026: प्रयागराज, 15 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश की पावन धरती प्रयागराज में आस्था का जो सैलाब आज महाशिवरात्रि के अवसर पर उमड़ा, उसने इतिहास के सारे पुराने पन्ने पलट दिए हैं। संगम नगरी आज ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से न केवल गूंज रही थी, बल्कि भक्ति के उस चरम पर थी जिसे शब्दों में पिरोना कठिन है। माघ मेले के अंतिम स्नान पर्व पर लाखों-करोड़ों भक्तों ने त्रिवेणी में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया।

ब्रह्ममुहूर्त से ही उमड़ी शिवभक्तों की टोली: संगम तट पर पैर रखने की जगह नहीं

रविवार की सुबह जब सूरज की पहली किरण भी नहीं फूटी थी, तभी से गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट पर भक्तों का जमावड़ा शुरू हो गया था। सुबह 3 बजे के ‘ब्रह्ममुहूर्त’ से ही शिवभक्तों ने पावन जल में डुबकी लगानी शुरू कर दी। 3.5 किलोमीटर लंबे विशाल घाटों पर स्थिति यह थी कि तिल रखने की भी जगह शेष नहीं बची। आंकड़ों की मानें तो सुबह 6 बजे तक करीब 10 लाख लोग स्नान कर चुके थे, लेकिन दोपहर होते-होते यह संख्या ढाई गुना से भी ज्यादा बढ़ गई। महाशिवरात्रि संगम स्नान 2026 की यह तस्वीर साक्षात देवलोक जैसी प्रतीत हो रही थी। श्रद्धालु केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत, नेपाल और विदेशों से भी बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने संगम पहुंचे।

Mahashivratri Sangam Snan 2026
Mahashivratri Sangam Snan 2026

22 करोड़ का जादुई आंकड़ा: माघ मेले ने बनाया वैश्विक कीर्तिमान

प्रयागराज माघ मेला 2026 अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक वैश्विक रिकॉर्ड बन चुका है। प्रशासन द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष पूरे मेले के दौरान कुल 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया है। यह संख्या किसी भी पिछले माघ मेले की तुलना में सर्वाधिक है। महाशिवरात्रि के इस छठवें और अंतिम स्नान पर्व के साथ ही माघ मेले का औपचारिक समापन हो गया। संगम की रेती पर एक महीने तक कठिन ‘कल्पवास’ करने वाले साधु-संत और गृहस्थ आज भारी मन से लेकिन संतुष्टि के भाव के साथ विदा ले रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस बार की व्यवस्था और सुविधाओं ने उनकी भक्ति को और अधिक सरल बना दिया।

AI कैमरों की निगरानी और अभेद्य सुरक्षा: प्रशासन की ‘अग्निपरीक्षा’ सफल

इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन ने अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था का परिचय दिया।

  • तकनीक का संगम: पूरे मेला क्षेत्र में 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनमें 150 एआई (AI) सक्षम कैमरे संदिग्ध गतिविधियों और भीड़ के घनत्व को ट्रैक कर रहे थे।
  • सुरक्षा बल: आरएएफ (RAF), एटीएस (ATS) कमांडो और पीएसी की टुकड़ियों ने चप्पे-चप्पे पर मोर्चा संभाला हुआ था।
  • सुविधाएं: श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह चिकित्सा शिविर, स्वच्छ पेयजल और सुगम यातायात की व्यवस्था की गई थी ताकि वृद्धों और बच्चों को कोई असुविधा न हो।

दान-पुण्य और रुद्राभिषेक का महासंयोग

महाशिवरात्रि पर संगम स्नान का महत्व तब और बढ़ जाता है जब भक्त स्नान के पश्चात सीधे शिवालयों की ओर रुख करते हैं। आज प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर, सोमेश्वर महादेव और नागवासुकि मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। मान्यता है कि आज के दिन संगम जल से भगवान शिव का अभिषेक करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। भक्तों ने महादेव को बेलपत्र, धतूरा, दूध और शहद अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। साथ ही, संगम तट पर अन्न, वस्त्र और स्वर्ण दान करने की भी होड़ मची रही।

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