ISRO को 2026 की शुरुआत में बड़ा झटका: लगातार दूसरी बार फेल हुआ PSLV
ISRO को 2026 के पहले मिशन में झटका। PSLV-C62 तीसरे चरण में फेल, EOS-N1 समेत 16 सैटेलाइट्स नष्ट। जानिए कारण, असर और आगे की राह।
ISRO News 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को साल 2026 के पहले ही मिशन में बड़ा झटका लगा है। देश का सबसे भरोसेमंद माने जाने वाला रॉकेट PSLV-C62 अपने निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका। इस विफलता के साथ ही ISRO को लगातार आठ महीनों में दूसरी बार दुर्लभ असफलता का सामना करना पड़ा है, जिसने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और कमर्शियल लॉन्च क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मिशन इसलिए भी अहम था क्योंकि इसके जरिए देश का अत्याधुनिक निगरानी सैटेलाइट EOS-N1 (अन्वेषा) और 15 अन्य छोटे सैटेलाइट्स को कक्षा में स्थापित किया जाना था।
शानदार शुरुआत, लेकिन तीसरे चरण में बिगड़ा खेल
260 टन वजनी PSLV-DL वेरिएंट ने 10:17 बजे IST पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफल उड़ान भरी। लॉन्च पूरी तरह योजनानुसार रहा। पहले और दूसरे चरण का प्रदर्शन सामान्य रहा और सॉलिड बूस्टर सेपरेशन भी बिना किसी समस्या के पूरा हुआ। देशभर में लोग इस ऐतिहासिक लॉन्च को लाइव देख रहे थे, लेकिन मिशन के लगभग आठ मिनट बाद स्थिति अचानक बदल गई। जैसे ही तीसरे चरण (Third Stage) का इग्निशन हुआ, मिशन कंट्रोल को मिलने वाला टेलीमेट्री डेटा अचानक बंद हो गया। यह स्पष्ट संकेत था कि रॉकेट अपने तय 505 किलोमीटर सूर्य-समकालिक कक्षा तक नहीं पहुंच पाया।

ISRO प्रमुख का बयान: “रोल रेट्स में गड़बड़ी आई”
घटना के बाद ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने कहा, “तीसरे चरण के अंत तक रॉकेट का प्रदर्शन सामान्य था, लेकिन उसके बाद रोल रेट्स में असामान्य व्यवहार देखा गया। इसके कारण रॉकेट अपने निर्धारित उड़ान पथ से भटक गया और मिशन को पूरा नहीं किया जा सका।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी उपलब्ध डेटा का गहन विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही विफलता विश्लेषण समिति (Failure Analysis Committee) गठित की जाएगी, जो इस तकनीकी चूक की जड़ तक पहुंचेगी।
EOS-N1 का नुकसान: देश की सुरक्षा को बड़ा झटका
इस मिशन की सबसे बड़ी क्षति EOS-N1 (अन्वेषा) सैटेलाइट का नष्ट होना है। यह एक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट था, जिसे DRDO के लिए विकसित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सीमाओं की निगरानी, समुद्री गतिविधियों पर नजर और दुश्मन ठिकानों की सटीक पहचान करना था।
इसके अलावा, मिशन में शामिल थे:
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भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित तकनीकी परीक्षण सैटेलाइट
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भारतीय छात्रों के प्रयोगात्मक उपग्रह
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स्पेन का KID री-एंट्री डिमॉन्स्ट्रेटर
अब ये सभी सैटेलाइट्स अंतरिक्ष मलबे में तब्दील हो चुके हैं।
लगातार दूसरी विफलता: PSLV की विश्वसनीयता पर सवाल
यह विफलता अगस्त 2025 में हुए PSLV-C61 मिशन की याद दिलाती है, जिसमें तीसरे चरण के चैंबर प्रेशर में गिरावट के कारण EOS-09 सैटेलाइट खो गया था। लगातार दो मिशनों में तीसरे चरण से जुड़ी समस्याएं सामने आने से PSLV के सॉलिड थर्ड स्टेज की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इससे पहले PSLV ने 63 में से 60 से अधिक सफल प्रक्षेपण किए हैं और इसकी सफलता दर लगभग 94% रही है। चंद्रयान-1 और आदित्य-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशन इसी रॉकेट ने सफलतापूर्वक पूरे किए थे।
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निजी अंतरिक्ष क्षेत्र और भविष्य की योजनाओं पर असर
PSLV के जरिए NSIL द्वारा किए जा रहे कमर्शियल राइडशेयर मिशनों की साख को भी इस विफलता से झटका लगा है। इससे भारत के उभरते निजी स्पेस स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा, यह विफलता ISRO की 2026 की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर असर डाल सकती है, जिनमें शामिल हैं:
- 100 से अधिक सैटेलाइट्स का प्रक्षेपण
- NavIC नेविगेशन सिस्टम का विस्तार
- गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारियां
हालांकि, ISRO नेतृत्व का कहना है कि PSLV की मॉड्यूलर डिजाइन के चलते आवश्यक सुधार संभव हैं और जरूरत पड़ने पर LVM3 जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।



