“लेकिन गरीबों का क्या होगा?”: दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर CJI की तीखी टिप्पणी, 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए गरीबों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठाया। 17 दिसंबर को होगी अहम सुनवाई।
Delhi NCR Pollution: दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। सोमवार को राजधानी और आसपास के इलाकों में घनी धुंध की चादर छाई रही, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

हालात इतने गंभीर हैं कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 498 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इसी बीच, इस गंभीर संकट पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भी चर्चा हुई, जहां चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने खास तौर पर गरीब तबके पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर की।
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“ऐसे आदेश दें जो लागू हो सकें” – CJI
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने साफ शब्दों में कहा कि अदालत वही आदेश पारित करेगी जिनका जमीनी स्तर पर पालन संभव हो।

CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हम समस्या को जानते हैं और ऐसे निर्देश देंगे जिनका पालन किया जा सके। लेकिन इन सबके बीच यह भी सोचना होगा कि गरीबों का क्या होगा?” उनका इशारा उन मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों की ओर था, जो खुले वातावरण में काम करने को मजबूर हैं और प्रदूषण का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव झेलते हैं। अदालत ने माना कि महानगरों में लोगों की जीवनशैली भी इस समस्या से जुड़ी है, लेकिन नीतियां बनाते समय समाज के सबसे कमजोर वर्ग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आदेशों के बावजूद स्कूलों में खेल गतिविधियां जारी
बच्चों की सेहत पर खतरा, नियमों का हो रहा उल्लंघन
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह, जो इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रही हैं, ने अदालत को बताया कि प्रदूषण से निपटने के लिए प्रोटोकॉल पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन बेहद कमजोर है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कई स्कूलों में खेल गतिविधियां जारी हैं। कुछ स्कूलों ने नियमों से बचने के “तरीके” निकाल लिए हैं, जिससे बच्चों की सेहत पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
एक अन्य वकील ने भी अदालत का ध्यान बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी याचिकाओं की ओर दिलाया और कहा कि पुराने आदेशों का उल्लंघन लगातार हो रहा है।
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दिल्ली का AQI 498, जहांगीरपुरी सबसे प्रदूषित
40 में से 38 केंद्र ‘गंभीर’ श्रेणी में
सोमवार को दिल्ली-NCR की हवा इस सीजन की सबसे खराब स्थिति में दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 40 निगरानी केंद्रों में से 38 पर AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में रहा।
जहांगीरपुरी में AQI 498 दर्ज किया गया, जो राजधानी का सबसे प्रदूषित इलाका रहा। वहीं, दो केंद्रों पर वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पाई गई। इस जहरीली हवा के कारण आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और गले में खराश जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
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प्रदूषण कोई “मौसमी” समस्या नहीं: सुप्रीम कोर्ट
हर महीने होगी सुनवाई, दीर्घकालिक समाधान पर जोर
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि वायु प्रदूषण से जुड़ी याचिकाओं को केवल सर्दियों तक सीमित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यह कोई “सामान्य” या “मौसमी” समस्या नहीं है, बल्कि एक स्थायी सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है।
इसी वजह से कोर्ट ने फैसला लिया है कि इस मुद्दे पर हर महीने कम से कम दो बार सुनवाई की जाएगी, ताकि अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के समाधान निकाले जा सकें।

अब यह मामला 17 दिसंबर (17 December) को तीन जजों की पीठ के सामने विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जहां अनुपालन और सख्त कदमों पर विस्तार से चर्चा होगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
दिल्ली-NCR में बढ़ता वायु प्रदूषण अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक और संवैधानिक चिंता का विषय बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट और CJI की टिप्पणियां साफ संकेत देती हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित एजेंसियों पर जवाबदेही का दबाव और बढ़ेगा।
सबसे अहम सवाल वही है जो CJI ने उठाया — “लेकिन गरीबों का क्या होगा?”
जब तक नीतियां जमीन पर लागू नहीं होंगी और सबसे कमजोर वर्ग को केंद्र में रखकर समाधान नहीं खोजे जाएंगे, तब तक जहरीली हवा से राहत मिलना मुश्किल है।
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