CBSE Class 10 Maths Paper: आंसू, पसीने और ‘ग्रेस मार्क्स’ की गुहार! क्या वाकई इतना कठिन था गणित का पेपर?

CBSE Class 10 Maths Paper Analysis: क्या सच में बहुत कठिन था गणित का पेपर? छात्र कर रहे ग्रेस मार्क्स की मांग। जानें क्या है पूरी सच्चाई और सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस।

CBSE Class 10 Maths Paper Toughness: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं कक्षा की परीक्षाएं शुरू होते ही विवादों और चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। इस साल गणित (Maths) के पेपर ने छात्रों के चेहरे की मुस्कान छीन ली है। परीक्षा केंद्रों के बाहर मायूस चेहरे और सोशल मीडिया पर ‘ग्रेस मार्क्स’ की बढ़ती मांग इस बात का गवाह है कि इस बार का गणित का मुकाबला आसान नहीं था। इंटरनेट पर एक तरफ छात्र अपनी आपबीती सुना रहे हैं, तो दूसरी तरफ विशेषज्ञ इस पेपर के स्तर पर अपनी अलग राय रख रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।

एग्जाम सेंटर के बाहर छलके आंसू: ट्रिग्नोमेट्री और केस स्टडी ने उलझाया

परीक्षा देकर बाहर निकले छात्रों के अनुसार, गणित का पेपर न केवल कठिन था, बल्कि काफी ‘ट्रिकी’ और लंबा भी था। कई छात्रों ने दावा किया कि ट्रिग्नोमेट्री (Trigonometry) और केस स्टडी के सवालों ने उन्हें इतना उलझाया कि समय का पता ही नहीं चला। नोएडा (Noida) के एक प्रतिष्ठित स्कूल के छात्र ने बताया, “पैराबोला पर आधारित केस स्टडी को समझना बहुत चुनौतीपूर्ण था। हमने बार-बार सवाल हल करने की कोशिश की, जिससे समय की भारी कमी हो गई और आखिरी के कुछ सवाल छूट गए।” आलम यह था कि कई परीक्षा केंद्रों के बाहर छात्र रोते हुए देखे गए। छात्रों का कहना है कि उन्होंने साल भर तैयारी की थी, लेकिन पेपर का स्तर उनकी उम्मीदों से कहीं ऊपर था।

CBSE Class 10 Maths Paper Toughness
CBSE Class 10 Maths Paper Toughness

सोशल मीडिया पर मचा बवाल: ‘NCERT से बाहर था पेपर?’

जैसे ही परीक्षा खत्म हुई, माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शिकायतों की बाढ़ आ गई। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि CBSE Class 10 Maths Paper का स्तर NCERT की किताबों और बोर्ड द्वारा जारी किए गए सैंपल पेपर से काफी अलग था। “प्रिय CBSE, क्या यह पेपर जानबूझकर इतना कठिन बनाया गया था ताकि छात्र दूसरे अटेम्प्ट के लिए मजबूर हों?” – एक यूजर का पोस्ट। शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों का भी मानना है कि पेपर ‘मॉडरेट’ से ‘टफ’ की श्रेणी में था। विशेष रूप से सेक्शन D और E (5 नंबर वाले प्रश्न) काफी गणनात्मक (Calculative) और समय लेने वाले थे। हालांकि, कुछ शिक्षकों का यह भी कहना है कि यदि कॉन्सेप्ट्स क्लियर होते, तो पेपर हल किया जा सकता था, लेकिन औसत छात्र के लिए यह निश्चित रूप से सिरदर्द साबित हुआ।

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ग्रेस मार्क्स और री-एग्जाम की मांग: क्या सुनेगा बोर्ड?

पेपर की कठिनता को देखते हुए अब छात्रों और अभिभावकों ने शिक्षा मंत्रालय और CBSE से ग्रेस मार्क्स (Grace Marks) देने की अपील की है। कुछ नाराज छात्रों ने तो री-एग्जाम (दोबारा परीक्षा) तक की मांग कर डाली है। छात्रों का तर्क है कि पहले ही पेपर के कठिन होने से उनका आत्मविश्वास डगमगा गया है, जिसका असर आने वाली अन्य परीक्षाओं पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, CBSE की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। आमतौर पर, बोर्ड विषय विशेषज्ञों से फीडबैक लेता है और यदि पेपर वास्तव में निर्धारित स्तर से ऊपर पाया जाता है, तो मार्किंग स्कीम में थोड़ी ढील दी जाती है।

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