dairy business: डेयरी व्यवसाय में कमाई का सुनहरा अवसर,सरकार दे रही लाखों रुपए

dairy business: आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत पशुपालकों को 75% बैंक ऋण, ब्याज प्रतिपूर्ति, मार्जिन मनी सहायता और कम लागत में डेयरी यूनिट स्थापित करने का सुनहरा मौका मिलता है। जानें, योजना के लाभ, पात्रता और इकाई लागत की पूरी जानकारी।

पशुपालन विभाग ( Animal Husbandry Department) द्वारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना लागू की गई है। यह योजना पशुपालकों को 75% बैंक ऋण और ब्याज प्रतिपूर्ति के साथ डेयरी व्यवसाय शुरू करने का सुनहरा अवसर प्रदान करती है।

dairy business: पात्रता शर्तें: किसे मिलेगा लाभ?
उप संचालक डॉ. राजेश मिश्रा के अनुसार योजना का लाभ पाने के लिए-
1.पशुपालक के पास कम से कम 5 दुधारू पशु होने चाहिए
2.न्यूनतम 1 एकड़ कृषि भूमि अनिवार्य है
3.यदि पशुओं की संख्या बढ़ती है तो उसी अनुपात में भूमि का होना आवश्यक है

dairy business: इकाई लागत: गाय और भैंस के अनुसार राशि निर्धारित
योजना के अंतर्गत अलग-अलग पशुधन इकाइयों के लिए लागत इस प्रकार निर्धारित की गई है:
5 पशुओं की इकाई लागत
5 भैंसें: ₹4,25,000
5 शंकर नस्ल की गायें: ₹3,82,000
5 देशी गायें: ₹2,43,750

dairy business: 10 पशुओं की इकाई लागत
10 भैंसें: ₹8,40,000
10 शंकर गायें: ₹7,51,000
10 देशी गायें: ₹4,75,000

dairy business: 75% तक ऋण सुविधा और ब्याज प्रतिपूर्ति का लाभ
योजना में कुल इकाई लागत का 75% भाग बैंक वित्तपोषण से दिया जाता है।
शेष 25% राशि हितग्राही को स्वयं अंशदान के रूप में देनी होती है।

dairy business: 5% ब्याज प्रतिपूर्ति (Interest Subsidy)
बैंक ऋण पर 5% ब्याज अनुदान दिया जाता है
प्रतिवर्ष अधिकतम ₹25,000 तक अनुदान

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dairy business: मार्जिन मनी सहायता: SC/ST को अधिक फायदा
योजना के अंतर्गत विशेष रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए अतिरिक्त लाभ शामिल हैं- सामान्य वर्ग,परियोजना लागत का 25% अधिकतम ₹1,25,000 मार्जिन मनी
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति,परियोजना लागत का 33%अधिकतम ₹2,00,000 मार्जिन मनी सहायता

dairy business: प्रक्रिया: बैंक से स्वीकृति के बाद राशि जारी
पशुपालन विभाग ( Animal Husbandry Department) द्वारा तैयार प्रकरण बैंकों को भेजा जाता है बैंक से प्रकरण स्वीकृत होने पर हितग्राही को इकाई लागत की राशि उपलब्ध कराई जाती है इसके बाद पशुपालक अपनी डेयरी यूनिट की स्थापना शुरू कर सकते हैं

dairy business: योजना से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
रीवा (Rewa) जिले में इस योजना के अंतर्गत अनेक पशुपालक सफलतापूर्वक डेयरी यूनिट संचालित कर रहे हैं।
इससे न केवल दुधारू पशुओं की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में नौकरी और आय के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

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