रॉकेट की रफ्तार से बढ़ेगी भारतीय इकोनॉमी! GDP के नए आंकड़ों ने सबको चौंकाया, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर
भारत की जीडीपी के नए आंकड़े जारी! वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में विकास दर 7.8% रही। जानें नए बेस ईयर (2022-23) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के उछाल का अर्थव्यवस्था पर असर।
India’s GDP Growth Rate: भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर दिख रही है, लेकिन नए ‘आधार वर्ष’ (Base Year) और सालाना अनुमानों में हुए बदलाव ने भविष्य के लिए एक बेहद सकारात्मक तस्वीर पेश की है। सांख्यिकी मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8% रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इन आंकड़ों के मायने क्या हैं और एक्सपर्ट्स इसे लेकर क्या राय रखते हैं।
दूसरी तिमाही के मुकाबले धीमी हुई रफ्तार, पर उम्मीदें बरकरार
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (1 अक्टूबर 2025 से 31 दिसंबर 2025) में आर्थिक विकास दर 7.8% दर्ज की गई है। अगर इसकी तुलना दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) से करें, तो वहां विकास दर 8.4% रही थी। यानी प्रतिशत के लिहाज से ग्रोथ में थोड़ी गिरावट देखी गई है। लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इसे केवल गिरावट के तौर पर देखना गलत होगा। किसी भी देश की जीडीपी अगर 7% से ऊपर बनी हुई है, तो इसका सीधा मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था का विस्तार मजबूती से हो रहा है। आर्थिक गतिविधियों में यह मामूली बदलाव वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू खपत के तालमेल का परिणाम है।

नया बेस ईयर 2022-23: अब एकदम सटीक होगा अर्थव्यवस्था का आकलन
इस बार के जीडीपी आंकड़ों की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इन्हें नई सीरीज के आधार पर जारी किया गया है। सरकार ने जीडीपी मापने के लिए आधार वर्ष (Base Year) को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है।बेस ईयर बदलने का क्या मतलब है?
- सटीकता: पुराना बेस ईयर एक दशक से ज्यादा पुराना हो चुका था, जिसमें कई नए सेक्टर शामिल नहीं थे।
- आधुनिक डेटा: 2022-23 को आधार बनाने से डिजिटल इकोनॉमी, नए स्टार्टअप्स और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग का डेटा अब जीडीपी में ज्यादा बेहतर तरीके से रिफ्लेक्ट होगा।
- ग्रोथ का सही पैमाना: इससे यह पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था का वास्तविक साइज मौजूदा समय में कितना बड़ा है।
पूरे साल के लिए अनुमान बढ़ा: 7.6% की दर से दौड़ेगा भारत
भले ही तीसरी तिमाही में रफ्तार थोड़ी कम हुई हो, लेकिन सरकार ने पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए अपने अनुमानों को अपडेट किया है, जो काफी उत्साहजनक हैं। सरकार ने पूरे साल की विकास दर का अनुमान 7.1% से बढ़ाकर 7.6% कर दिया है। सांख्यिकी मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ने के लिए तैयार है। यह संशोधन दर्शाता है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में आने वाले समय में भारी उछाल आने की उम्मीद है।
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एक्सपर्ट्स की राय: मैन्युफैक्चरिंग और फेस्टिव सीजन का कमाल
दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजधानी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर शिवाजी का कहना है कि आंकड़ों के पीछे कई मजबूत स्तंभ हैं। उनके अनुसार: “मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 10% से अधिक की वृद्धि एक शानदार संकेत है। इसके अलावा, सितंबर में जीएसटी दरों में हुए बदलाव और तीसरी तिमाही के दौरान दिवाली-दशहरा जैसे त्योहारों के कारण घरेलू मांग (Consumption) में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। कृषि क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन भी इसमें सोने पर सुहागा साबित हुआ है।”



