दवा या ‘दहशत’? स्कूल में कीड़े की दवा खाते ही बेहोश होने लगे 110 बच्चे, चीख-पुकार के बीच मची अफरा-तफरी
यूपी के फर्रुखाबाद में स्कूल में कीड़े की दवा (Albendazole) खाने से 110 बच्चे बीमार। आखिर क्यों दवा खाने के 15 मिनट बाद ही बच्चे गश खाकर गिरने लगे? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Children Fall Ill After Taking Insecticide At School: यूपी के फर्रुखाबाद (Farrukhabad) से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में पेट के कीड़े मारने की दवा (Albendazole) खिलाते ही बच्चों की तबीयत इस कदर बिगड़ी कि स्कूल परिसर अस्पताल के वार्ड में तब्दील हो गया। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फर्रुखाबाद (Farrukhabad) जिले के जहानगंज क्षेत्र स्थित मोईनुद्दीनपुर रठौरा गांव में मंगलवार का दिन मासूम बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा। जवाहरलाल प्रेमादेवी जूनियर हाईस्कूल में स्कूल में कीड़े की दवा से बच्चे बीमार होने की घटना ने पूरे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है।
15 मिनट के भीतर एक-एक कर गिरने लगे मासूम
स्कूल में कुल 270 छात्र पंजीकृत हैं, जिनमें से मंगलवार को 150 बच्चे उपस्थित थे। दोपहर करीब 12:30 बजे प्रधानाध्यापक फूल सिंह ने सभी कक्षाओं में जाकर पेट के कीड़े मारने वाली एल्बेंडाजोल (400mg) की गोलियां बांटीं। दवा खाने के महज 15 मिनट बाद ही कक्षा एक के प्रशांत और कक्षा चार के रितिक व आदित्य को चक्कर आने लगे और वे जमीन पर गिर पड़े। देखते ही देखते 110 बच्चों की हालत बिगड़ गई। किसी को उल्टियां होने लगीं तो कोई जी मिचलाने की शिकायत करने लगा। स्कूल में मची अफरा-तफरी को देख शिक्षकों के हाथ-पांव फूल गए। जैसे ही यह खबर गांव में फैली, ग्रामीण और अभिभावक लाठी-डंडे लेकर स्कूल की ओर दौड़ पड़े। हालात बिगड़ते देख सात शिक्षकों वाला स्टाफ धीरे-धीरे मौके से खिसक गया।

स्वास्थ्य विभाग और एंबुलेंस के सायरन से थर्राया गांव
घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जिले के आला अधिकारियों को सूचित किया गया। गांव में एक साथ 8 एंबुलेंस के सायरन गूंजने लगे, जिससे युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई।
- 61 बच्चों को लोहिया अस्पताल रेफर किया गया।
- 33 बच्चों का इलाज सीएचसी कमालगंज में शुरू हुआ।
- एंबुलेंस में जगह कम पड़ने पर कई अभिभावक अपने बच्चों को गोद में लेकर अस्पताल की ओर भागे।
जिलाधिकारी (DM) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अवनींद्र कुमार खुद मौके पर पहुंचे। डॉक्टरों की एक विशेष टीम, जिसमें डॉ. उदयराज, धीर सिंह और विवेक सक्सेना शामिल थे, ने मोर्चा संभाला। जांच में पाया गया कि दवा की एक्सपायरी डेट 2028 थी, यानी दवा खराब नहीं थी।
लापरवाही का आरोप (Accusation of Negligence): नियमों को ताक पर रखकर बांटी गई दवा
इस पूरी घटना में स्कूल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के प्रोटोकॉल के अनुसार, दवा खिलाते समय स्वास्थ्य कर्मी (ANM) का होना अनिवार्य है और दवा बच्चों के सामने ही खिलानी चाहिए।
- शिक्षकों की मनमानी (Arbitrariness of teachers): ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षकों ने बच्चों को बस गोलियां थमा दीं और बच्चों ने बिना सही निर्देश के उन्हें खा लिया।
- डर का प्रभाव (Mass Hysteria): डॉक्टरों का मानना है कि तीन बच्चों को गश खाकर गिरता देख बाकी बच्चे डर (Panic Attack) की वजह से बीमार महसूस करने लगे।
- खाली पेट दवा? यह भी जांच का विषय है कि क्या बच्चों ने दवा खाली पेट खाई थी, क्योंकि एल्बेंडाजोल के खाली पेट सेवन से अक्सर चक्कर या जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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राहत की खबर: अब खतरे से बाहर हैं बच्चे
राहत की बात यह रही कि समय रहते इलाज मिलने से सभी बच्चों की स्थिति सामान्य हो गई। सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने पुष्टि की है कि स्कूल में कीड़े की दवा से बच्चे बीमार तो हुए थे, लेकिन उपचार के बाद वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। अस्पताल में भर्ती बच्चे कुछ ही घंटों बाद ठीक होकर वहां लगे जिम में खेलते हुए भी नजर आए। बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों और दवा वितरण के समय अनुपस्थित रहने वाली एएनएम चांदनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।



