खतरे की घंटी! पूर्वी यूपी में 5 साल में 45% बढ़े कैंसर के मरीज; BRD मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट ने किया चौंकाने वाला खुलासा

पूर्वी यूपी में कैंसर के मामलों में 45% की भारी बढ़ोतरी! बीआरडी मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट ने उड़ाए होश। जानिए पुरुषों और महिलाओं में कौन से कैंसर हैं सबसे आम और क्या है बचाव के उपाय।

Cancer in Eastern UP: पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने विशेषज्ञों और आम जनता की नींद उड़ा दी है। गोरखपुर स्थित बाबा साहेब राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपी विभाग द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में क्षेत्र में कैंसर के मरीजों की संख्या में 45 प्रतिशत का डरावना इजाफा हुआ है। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में जहां पंजीकृत मरीजों की संख्या 10,553 थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 15,009 हो गई है।

पुरुषों में ‘मुख कैंसर’ और महिलाओं में ‘सर्वाइकल कैंसर’ का बढ़ा ग्राफ

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश रावत (Rakesh Rawat) के अनुसार, ओपीडी में आने वाले मरीजों के पैटर्न में एक खास बदलाव देखा गया है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पुरुषों में गुटखा, तंबाकू और धूम्रपान के कारण ओरल (मुख) कैंसर सबसे अधिक पैर पसार रहा है।

  • ओरल कैंसर का दबदबा: कुल ओपीडी मरीजों में से 24 फीसदी अकेले ओरल कैंसर के शिकार हैं।
  • महिलाओं पर दोहरी मार: महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (18%) और स्तन कैंसर (12.6%) के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं।
  • अन्य अंगों पर हमला: इसके अलावा गॉल ब्लेडर (9.6%), फेफड़े (4.5%), और पेट-आंत (4.52%) के कैंसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 महामारी के बाद से कैंसर के नए मामलों के पंजीकरण में अप्रत्याशित तेजी आई है, जो कि चिंता का प्रमुख विषय है।

Cancer in Eastern UP
Cancer in Eastern UP

इलाज की राह में रोड़ा: सुविधाओं का अभाव और रेफरल का दर्द

एक तरफ जहां मरीजों की संख्या 45% की दर से बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ इलाज की बुनियादी सुविधाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। पूर्वी यूपी के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों- बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर—में अभी तक पूर्णकालिक कैंसर सर्जरी की सुविधा सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाई है।

सर्जरी क्यों है ठप?

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल (Ramkumar Jaiswal) ने बताया कि इस वर्ष बांड पर कोई कैंसर सर्जन उपलब्ध नहीं हो सका। सर्जन की कमी के कारण गंभीर मरीजों को लखनऊ या दिल्ली जैसे बड़े शहरों के लिए रेफर करना पड़ता है। गरीब मरीजों के लिए यह “रेफरल” आर्थिक और शारीरिक रूप से कमर तोड़ देने वाला साबित हो रहा है। उचित समय पर सर्जरी न मिल पाना कैंसर के इलाज में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है।

चिकित्सा जगत में नई उम्मीद: बिना चीरे के ‘थायराइड कैंसर’ की सफल सर्जरी

निराशा के इन आंकड़ों के बीच चिकित्सा विज्ञान के चमत्कार की एक सुखद खबर भी सामने आई है। देवरिया के एक 28 वर्षीय युवक, जो सऊदी अरब में कार्यरत था, के गले में कैंसरयुक्त ट्यूमर पाया गया। पूर्वी यूपी में पहली बार सिनर्जी कैंसर इंस्टिट्यूट में डॉ. आलोक तिवारी ने एक अनोखी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने ‘ट्रांसएक्सिलरी थायरॉडेक्टॉमी’ (Transaxillary Thyroidectomy) तकनीक का उपयोग करते हुए बिना गले पर चीरा लगाए, कांख (Armpit) के रास्ते दूरबीन विधि से ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया।

  • फायदा: इस ‘स्कारलेस’ (बिना निशान वाली) सर्जरी के बाद मरीज के गले या चेहरे पर कोई निशान नहीं बचा है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जो कॉस्मेटिक कारणों से गले पर निशान नहीं चाहते।

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बीआरडी में बढ़ते आंकड़े: एक नजर में

वर्ष (Year) कैंसर के कुल पंजीकृत मामले (Total registered cancer cases)
2021 10,553
2022 11,720
2023 13,652
2024 14,312
2025 15,009

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