गोरखपुर के 43 हजार घरों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा! 721 करोड़ की सीवेज योजना को मंजूरी, अब सेप्टिक टैंक से मिलेगी आजादी
योगी कैबिनेट ने गोरखपुर के लिए 721.40 करोड़ रुपये की सीवरेज परियोजना को मंजूरी दी है। इससे 17 वार्डों के 43,604 घरों को लाभ मिलेगा और जलभराव व स्वच्छता की समस्या दूर होगी। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
Gorakhpur Sewerage Project: गोरखपुर (Gorakhpur) के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Adityanath) की कैबिनेट ने शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। गोरखपुर नगर निगम क्षेत्र में स्वच्छता और जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए 721 करोड़ 40 लाख 41 हजार रुपये की महत्वाकांक्षी सीवरेज परियोजना को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) जल निगम (नगरीय) द्वारा तैयार की गई इस योजना से न केवल शहर की सूरत बदलेगी, बल्कि करीब 2 लाख की आबादी को नारकीय जीवन से मुक्ति मिलेगी।
17 वार्डों के 43,604 घरों को मिलेगा सीधा लाभ
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ गोरखपुर के उन 17 वार्डों को मिलेगा जो लंबे समय से सीवेज और जल निकासी की समस्या से जूझ रहे थे। योजना के तहत 43,604 घरों को सीधे सीवर लाइन से जोड़ा जाएगा, जिससे इन परिवारों को अब पुराने और असुरक्षित सेप्टिक टैंकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। लाभान्वित होने वाले प्रमुख वार्ड: परियोजना के दायरे में बाबा राघव दास नगर (आंशिक), चरगांवा, अशोक नगर, शिवपुर, तुलसीराम पश्चिमी, शहीद शिव सिंह क्षेत्री नगर, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल नगर, हरसेवकपुर, विश्वकर्मापुरम बौलिया, शालिग्राम नगर, लोहिया नगर, कृष्णानगर, शाहपुर, मैत्रीपुरम, शक्तिनगर, राम जानकीनगर और विष्णुपुरम वार्ड शामिल हैं।

बजट का गणित: केंद्र और राज्य सरकार का साझा प्रयास
इस विशाल परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय मिलकर निवेश कर रहे हैं।
- भारत सरकार का अंश: 231 करोड़ 34 लाख 94 हजार रुपये।
- राज्य सरकार का अंश: 435 करोड़ 36 लाख रुपये।
- गोरखपुर नगर निगम का अंश: 27 करोड़ 76 लाख 48 हजार रुपये।
यह त्रिस्तरीय निवेश मॉडल सुनिश्चित करता है कि परियोजना के लिए फंड की कोई कमी न हो और काम समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।
अत्याधुनिक तकनीक और सोलर पावर प्लांट से लैस होगी परियोजना
यह केवल पाइप बिछाने की योजना नहीं है, बल्कि इसे पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक तकनीक के साथ डिजाइन किया गया है:
- 342 किमी लंबी सीवर लाइन: गोड़धोइया नाला के कैचमेंट एरिया में कुल 342.19 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
- 38 MLD का ट्रीटमेंट प्लांट: घरों से निकलने वाले कचरे को वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण के लिए 38 एमएलडी (MLD) क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पर ले जाया जाएगा।
- सोलर पावर प्लांट: ऊर्जा की बचत के लिए इस प्रोजेक्ट के तहत 1060 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट भी लगाया जाएगा, जो पंपिंग स्टेशनों को बिजली प्रदान करेगा।
- पंपिंग स्टेशन: सुचारू प्रवाह के लिए 37.50 MLD और 27 MLD क्षमता के दो सीवेज पंपिंग स्टेशन (SPS) भी बनाए जाएंगे।
पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
उत्तर प्रदेश जल निगम के अधिशासी अभियंता पंकज कुमार के अनुसार, यह परियोजना गोरखपुर की दशकों पुरानी जलभराव और सीवर संबंधी समस्याओं का अंत करेगी। शोधित जल को अंततः रामगढ़झील में छोड़ा जाएगा, जिससे झील की स्वच्छता भी बनी रहेगी और भूजल प्रदूषण कम होगा।



