गोरखपुर में ‘पाताल’ की खुदाई से जमींदोज हुआ ‘आसमान’: देखते ही देखते भरभराकर गिरा 3 मंजिला मकान, रोंगटे खड़े कर देगा यह मंजर!
गोरखपुर के भटहट में नाली खुदाई के दौरान गिरा 3 मंजिला मकान। जेसीबी ड्राइवर मौके से भागा। जानें कैसे टला बड़ा हादसा और क्या बोले पीडब्ल्यूडी के अधिकारी।
Gorakhpur House Collapse: नमस्ते! गोरखपुर (Gorakhpur) के भटहट में हुई यह घटना वाकई चौंकाने वाली है। एक तीन मंजिला इमारत का ताश के पत्तों की तरह ढह जाना किसी डरावने सपने से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गोरखपुर (Gorakhpur) जिले के भटहट क्षेत्र से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ बड़हरिया (Badharia) गांव के पास निर्माणाधीन फोरलेन के किनारे स्थित एक विशाल तीन मंजिला मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया। घटना उस समय हुई जब सड़क किनारे नाली की खुदाई का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मकान गिरते समय की आवाज इतनी तेज थी कि लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन आर्थिक नुकसान का आंकड़ा लाखों में बताया जा रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर वह क्या गलती थी, जिसकी वजह से पलक झपकते ही एक परिवार की छत छिन गई।
नाली की 15 फीट गहरी खुदाई बनी काल, थरथराने लगी नींव
यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 11:40 बजे की है। भटहट-बासस्थान निर्माणाधीन फोरलेन पर पीडब्ल्यूडी (PWD) द्वारा नाली निर्माण का कार्य किया जा रहा था। स्थानीय निवासी शहाबुद्दीन का तीन मंजिला मकान ठीक इसी सड़क के किनारे स्थित था। बताया जा रहा है कि नाली बनाने के लिए मकान की नींव से बिल्कुल सटाकर करीब 15 फीट गहरा गड्ढा खोदा जा रहा था। जैसे ही जेसीबी ने खुदाई तेज की, भारी मशीन के कंपन और मिट्टी खिसकने (Landslide) के कारण मकान की नींव कमजोर पड़ गई। देखते ही देखते मकान हिलने लगा। यह मंजर देखकर जेसीबी चालक के हाथ-पांव फूल गए और वह मशीन लेकर मौके से फरार हो गया। इसके कुछ ही सेकंड बाद पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई।

पड़ोसियों के शोर से बची जान, खाली था मकान
इस गोरखपुर मकान हादसे में सबसे राहत वाली बात यह रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार, फोरलेन निर्माण के चलते मकान का कुछ हिस्सा पहले ही पीडब्ल्यूडी द्वारा चिन्हित किया गया था, जिसे शहाबुद्दीन ने खुद ही तुड़वा दिया था। सुरक्षा की दृष्टि से परिवार पहले ही गांव के दूसरे मकान में शिफ्ट हो चुका था। हालांकि, घर के भीतर राशन, फर्नीचर और अन्य घरेलू कीमती सामान रखा हुआ था, जो अब पूरी तरह नष्ट हो चुका है। जब मकान हिलना शुरू हुआ, तो पड़ोसियों ने सूझबूझ दिखाई और चिल्लाकर वहां मौजूद मजदूरों और राहगीरों को दूर हटने के लिए आगाह किया। अगर उस समय घर के अंदर लोग होते, तो एक बड़ा नरसंहार हो सकता था।
राजस्व विभाग और PWD की जांच शुरू, मुआवजे की तैयारी
हादसे की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। राजस्व विभाग की टीम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। हल्का लेखपाल रजत वर्मा ने घटनास्थल का मुआयना किया और नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। इस मलबे की चपेट में आने से बगल में स्थित लुकमान नामक व्यक्ति का मकान भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है। फिलहाल, निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच की जा रही है:
- क्या खुदाई के दौरान सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) का पालन किया गया था?
- इतनी गहरी खुदाई के समय नींव को सपोर्ट क्यों नहीं दिया गया?
- पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार और जेसीबी चालक की लापरवाही पर क्या कार्रवाई होगी?
अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर पीड़ित परिवार को मुआवजे की राशि प्रदान की जाएगी।



