राहुल और खड़गे को पीछे बैठाने पर एक हो गई पूरी कांग्रेस, उड़ा डाली मोदी की धज्जियां
77वें गणतंत्र दिवस पर परेड के दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को पीछे की सीट पर बैठाने को लेकर कांग्रेस एकजुट हो गई है। जानिए क्यों मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक मर्यादाएं तोड़ने का आरोप लग रहा है।
Rahul Gandhi Republic Day Controversy: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य परेड के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) को पीछे की पंक्ति में बैठाए जाने को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी पूरी तरह एकजुट नजर आ रही है और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का खुला उल्लंघन बताया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मोदी सरकार जानबूझकर विपक्ष के शीर्ष नेताओं का अपमान कर रही है, जो न केवल असंवैधानिक है बल्कि लोकतंत्र की आत्मा के भी खिलाफ है।
प्रोटोकॉल पर सवाल: क्या नेता प्रतिपक्ष को मिला उचित सम्मान?
सबसे पहले कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए सरकार से सीधा सवाल पूछा कि क्या देश में नेता प्रतिपक्ष के साथ ऐसा व्यवहार शिष्टाचार, परंपरा और प्रोटोकॉल के मानकों पर खरा उतरता है? सुरजेवाला ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक होते हैं, लेकिन राष्ट्रीय पर्व जैसे गणतंत्र दिवस पर विपक्ष के नेता के साथ इस तरह का व्यवहार सरकार की हीन मानसिकता और राजनीतिक असहिष्णुता को दर्शाता है। उन्होंने राहुल गांधी के साथ हुए इस व्यवहार को “पूरी तरह अस्वीकार्य” करार दिया।

तारिक अनवर का आरोप: मोदी युग में खत्म की जा रही परंपराएं
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, तब से देश की स्थापित परंपराओं को लगातार कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्य विपक्षी दल के नेता को आगे की पंक्ति में क्यों नहीं बैठाया गया? अनवर ने कहा कि पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि नेता प्रतिपक्ष को सरकारी समारोहों में दूसरे या तीसरे दर्जे की पंक्ति में बैठाया गया हो। तारिक अनवर ने आगे आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में विपक्ष को संसद में बोलने तक का मौका नहीं दिया जाता और अब राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी उन्हें उनका सम्मानजनक स्थान नहीं मिल रहा। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए बेहद दुखद स्थिति बताया।
विवेक तन्खा बोले-यह राष्ट्रीय पर्व है, किसी पार्टी का आयोजन नहीं
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा (Vivek Tankha) ने भी समारोह की तस्वीरें साझा करते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने इस घटना को सरकार की “ओछी मानसिकता” का उदाहरण बताया। विवेक तन्खा (Vivek Tankha) ने कहा कि गणतंत्र दिवस पूरे देश का पर्व है, न कि किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम। ऐसे में विपक्षी नेताओं को उचित सम्मान न देना लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वस्थ परंपराओं के खिलाफ है। उनका कहना था कि सत्ता में बैठी सरकार को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र केवल बहुमत से नहीं, बल्कि विपक्ष के सम्मान से भी चलता है।
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कांग्रेस हुई एकजुट, मोदी सरकार पर तीखा हमला
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस पार्टी पूरी तरह एक सुर में नजर आ रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल राहुल गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा प्रहार है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार असहमति की आवाज को दबाने और विपक्ष को हाशिए पर डालने की लगातार कोशिश कर रही है। राष्ट्रीय पर्व जैसे अवसर पर इस तरह का व्यवहार सरकार की राजनीतिक संकीर्णता को उजागर करता है।



