रांची विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला: इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज अब बना डिपार्टमेंट ऑफ लॉ
रांची विश्वविद्यालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज का नाम बदलकर डिपार्टमेंट ऑफ लॉ कर दिया है। जानिए छात्रों के विरोध, डिग्री वैधता और भविष्य की चुनौतियों से जुड़ी पूरी जानकारी।
Department of Law Ranchi University: रांची विश्वविद्यालय ने एक अहम प्रशासनिक और अकादमिक निर्णय लेते हुए ‘इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज’ का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘डिपार्टमेंट ऑफ लॉ, रांची विश्वविद्यालय’ कर दिया है।

यह फैसला बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्धारित मानकों और नियमों के अनुरूप लिया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि पहले प्रयुक्त नाम बीसीआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं था, जिसके कारण छात्रों की डिग्री की वैधता को लेकर आशंकाएं उत्पन्न हो रही थीं।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब लंबे समय से लॉ के छात्र इस नामकरण को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और विश्वविद्यालय प्रशासन से सुधार की मांग कर रहे थे।
बीसीआई के नियमों के अनुरूप हुआ नाम परिवर्तन
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, भारत में विधि शिक्षा केवल विश्वविद्यालय के विभाग (Department of Law), स्कूल ऑफ लॉ अथवा किसी संबद्ध कॉलेज के अंतर्गत संचालित सेंटर फॉर लीगल एजुकेशन के माध्यम से ही मान्य होती है।
बीसीआई के दिशा-निर्देशों में ‘इंस्टीट्यूट’ शब्द को स्वतंत्र विधि शिक्षा इकाई के रूप में मान्यता नहीं दी गई है। इसी तकनीकी खामी के कारण रांची विश्वविद्यालय के लॉ छात्रों को यह डर सताने लगा था कि भविष्य में उनकी डिग्री पर सवाल उठ सकते हैं, खासकर जब वे वकालत के लिए नामांकन (Enrollment) या उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस विसंगति को स्वीकार करते हुए नाम परिवर्तन का निर्णय लिया, ताकि विधि शिक्षा को पूरी तरह से बीसीआई के मानकों के अनुरूप किया जा सके।
छात्रों के विरोध के बाद हरकत में आया विश्वविद्यालय प्रशासन
इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के छात्रों ने बीते कई महीनों से लगातार इस मुद्दे को उठाया था। छात्रों का कहना था कि केवल नाम बदलना ही नहीं, बल्कि अकादमिक संरचना में भी सुधार की आवश्यकता है।
अब तक बीबीए-एलएलबी के दो बैच और एलएलएम के पांच बैच को पुराने नाम से ही डिग्री सर्टिफिकेट जारी किए जा चुके हैं। इस तथ्य को लेकर छात्रों में गहरी नाराजगी थी, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि यह तकनीकी त्रुटि उनके करियर में बाधा बन सकती है।
छात्र संगठनों और प्रतिनिधियों द्वारा लगातार ज्ञापन सौंपे जाने और विरोध प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंततः अधिसूचना जारी कर यह स्पष्ट किया कि आगे से सभी डिग्री सर्टिफिकेट ‘डिपार्टमेंट ऑफ लॉ, रांची विश्वविद्यालय’ के नाम से ही जारी किए जाएंगे।

नाम बदला, लेकिन क्या पूरी समस्या का समाधान हुआ?
हालांकि नाम परिवर्तन को छात्रों ने एक सकारात्मक कदम माना है, लेकिन उनका कहना है कि यह समाधान अधूरा है। देशभर में लॉ को एक प्रोफेशनल कोर्स के रूप में संचालित किया जाता है, जबकि रांची विश्वविद्यालय में इसे अब भी वोकेशनल कोर्स की श्रेणी में रखा गया है।
छात्रों का तर्क है कि जब लॉ एक पेशेवर डिग्री है, तो उसकी पढ़ाई, परीक्षा प्रणाली, इंटर्नशिप और अकादमिक ढांचा भी उसी स्तर का होना चाहिए। वे मांग कर रहे हैं कि विश्वविद्यालय न केवल नामकरण बल्कि पाठ्यक्रम, फैकल्टी स्ट्रक्चर और प्रशासनिक स्वायत्तता में भी सुधार करे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालय इन पहलुओं पर भी ध्यान देता है, तो झारखंड में विधि शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है और छात्र राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकेंगे।



