बिहार में 65 लाख वोटरों का रहस्यमय ढंग से गायब होना: कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी का बड़ा खुलासा। 65 लाख वोटरों के रहस्यमय ढंग से डिलीट होने का दावा। जानिए क्यों चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल।

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की हार के बाद, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक बड़ा राजनीतिक भूचाल ला दिया है।
तिवारी ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर सुनियोजित ढंग से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवा रहे हैं।

65 लाख वोट रहस्यमय तरीके से ‘डिलीट’
प्रमोद तिवारी ने विशेष रूप से बिहार का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य में 65 लाख मतदाताओं के नाम रहस्यमय तरीके से सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने इस घटना को ‘एक रहस्यमयी कहानी’ बताया।
उन्होंने इस प्रक्रिया की अनियमितताओं को उजागर करते हुए बताया:
📍 अजीब विसंगतियां: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ऐसे घर और पोलिंग स्टेशन दिखाए हैं, जहां एक ही मकान में 500 से 600 लोगों के वोट दर्ज हैं, जो मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

महाराष्ट्र में भी स्थिति समान: तिवारी ने आगे बताया कि इसी तरह की अनियमितताएं महाराष्ट्र में भी देखने को मिली हैं, जहाँ ‘एक-एक घर में एक-एक हजार लोग’ सूचीबद्ध हैं।
मॉडल की फोटो पर वोट: उन्होंने हरियाणा के चुनाव का भी उदाहरण दिया, जहाँ एक ब्राजील की मॉडल की तस्वीर का उपयोग करके चुनाव संपन्न कराया जा रहा था, जो कि मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया की सुरक्षा और अखंडता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर टिप्पणी
इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि “ऐसा लगता है कि बीजेपी के मुँह में खून लग गया है,” और उन्होंने चुनाव आयोग पर ‘पूरी तरह से खामोश होकर इस बेईमानी को करवाने में शामिल’ होने का आरोप लगाया।
उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव आयोग से सवाल किया कि वह नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सार्वजनिक रूप से उठाए गए सवालों का जवाब क्यों नहीं देता है, खासकर तब जब उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ये गंभीर आरोप लगाए हैं।

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