Alert: तला-भुना खाना आपके लीवर को बना रहा है कैंसर का ‘गढ़’! नई रिसर्च का चौंकाने वाला सच, आज ही जान लें वरना पछताएंगे
तला-भुना और फैट वाला खाना लीवर कैंसर का खतरा कैसे बढ़ाता है? MIT की नई रिसर्च से जानें फैटी डाइट का लीवर पर खतरनाक असर।
Fried Foods And Liver Cancer: अगर आप तला-भुना और चिकनाई (फैट) वाला खाना ज्यादा पसंद करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है।

एक नई रिसर्च में पता चला है कि लंबे समय तक फैट वाली डाइट लेने से न सिर्फ लीवर में चर्बी जमा होती है, बल्कि यह लीवर कैंसर के खतरे को खतरनाक तरीके से बढ़ा देती है। एमआईटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि चिकनाई वाला खाना लीवर की कोशिकाओं को एक ‘सर्वाइवल मोड’ में धकेल देता है, जो कैंसर की आशंका को चुपचाप बढ़ा देता है।
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क्या होता है लीवर की कोशिकाओं के साथ?
रिसर्च के मुताबिक, जब लीवर की परिपक्व कोशिकाएं (हेपेटोसाइट्स) लगातार फैट वाले भोजन के संपर्क में रहती हैं, तो वे तनाव में आ जाती हैं। इस तनाव से बचने के लिए ये कोशिकाएं अपना सामान्य काम करना छोड़ देती हैं और एक आदिम, स्टेम-सेल जैसी स्थिति में वापस चली जाती हैं। यह बदलाव उन्हें तनाव झेलने में तो मदद करता है, लेकिन लंबे समय में यही कोशिकाएं कैंसरग्रस्त होने के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं।

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क्यों बढ़ता है कैंसर का खतरा?
वैज्ञानिकों ने समझाया कि जब लीवर की कोशिकाएं इस कम परिपक्व अवस्था में होती हैं और अगर उनमें कोई हानिकारक म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) हो जाता है, तो वे तेजी से कैंसर की दिशा में बढ़ सकती हैं। रिसर्चर कॉन्सटेंटाइन ट्ज़ौअनास के मुताबिक, “इन कोशिकाओं ने कैंसर बनने के लिए जरूरी जीन्स पहले ही चालू कर लिए होते हैं। उन्होंने उस परिपक्व पहचान से दूर जाना शुरू कर दिया होता है जो उनकी बढ़ने की क्षमता को रोकती।”
इंसानों पर क्या है असर?
यह अध्ययन चूहों पर किया गया था, लेकिन जब शोधकर्ताओं ने लीवर की बीमारी से पीड़ित मरीजों के ऊतकों का विश्लेषण किया, तो उनमें भी ठीक यही पैटर्न मिला। उन लोगों में जहां लीवर के सामान्य कामकाज के जीन्स की गतिविधि कम थी, वहां मरीजों के जीवित रहने की संभावना भी कम पाई गई। वैज्ञानिकों का मानना है कि चूहों में यह प्रक्रिया एक साल में होती है, जबकि इंसानों में यह लगभग 20 साल की अवधि में फैली हो सकती है।

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क्या नुकसान को पलटा जा सकता है?
शोधकर्ता अब यह पता लगाना चाहते हैं कि क्या फैट वाली डाइट से हुए नुकसान को वापस लौटाया जा सकता है। आने वाले अध्ययन यह जांचेंगे कि क्या स्वस्थ आहार पर लौटने या वजन घटाने की दवाओं (जैसे GLP-1 एगोनिस्ट) से लीवर की कोशिकाओं के सामान्य व्यवहार को बहाल किया जा सकता है। साथ ही, उन कुछ विशेष जीन्स को दवा का निशाना बनाने पर भी काम चल रहा है, ताकि क्षतिग्रस्त लीवर के ऊतकों को कैंसर की ओर बढ़ने से रोका जा सके।
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सीधे शब्दों में कहें तो, चिकनाई वाला आहार लीवर के लिए सिर्फ ‘फैटी लीवर’ की बीमारी ही नहीं लाता, बल्कि उसे कैंसर के लिए एक खतरनाक शुरुआती बढ़त भी दे देता है। यह शोध एक चेतावनी है कि हमारी खानपान की आदतें सीधे तौर पर हमारे अंदरूनी अंगों के स्वास्थ्य और कैंसर के जोखिम से जुड़ी हैं।



