“यरूशलम में UN मुख्यालय पर बुलडोजर एक्शन: इजरायल ने UNRWA को बताया आतंकी ठिकाना, क्यों कहा ‘ऐतिहासिक दिन’?”

पूर्वी यरूशलम में स्थित UNRWA मुख्यालय को इजरायली सेना ने बुलडोजर से गिरा दिया। जानिए क्यों इजरायल ने इसे आतंकी अड्डा बताया, UN का तीखा विरोध और इस कार्रवाई के वैश्विक मायने।

Jerusalem UNRWA Demolition By Israel: पूर्वी यरूशलम में मंगलवार सुबह उस वक्त तनाव फैल गया, जब इजरायली सेना बुलडोजर और भारी मशीनों के साथ संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNRWA (United Nations Relief and Works Agency) के मुख्यालय में दाखिल हुई। देखते ही देखते पूरे कैंपस को जमींदोज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। इजरायल (Israel) का दावा है कि यह इमारत अब संयुक्त राष्ट्र के किसी आधिकारिक काम के लिए इस्तेमाल नहीं हो रही थी और इसे हमास से जुड़े “आतंकी नेटवर्क” के संचालन केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। इजरायली विदेश मंत्रालय ने कहा कि UNRWA पहले ही यहां से अपना ऑपरेशन बंद कर चुका था, इसलिए इस परिसर को कोई कूटनीतिक या अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा (इम्यूनिटी) प्राप्त नहीं थी। इजरायल की संसद नेसेट ने अक्टूबर 2024 में UNRWA के खिलाफ दो कानून पारित किए थे, जिनके तहत इस एजेंसी को इजरायली नियंत्रण वाले इलाकों में काम करने से रोक दिया गया। सरकार का कहना है कि यह बुलडोजर कार्रवाई उसी कानून के तहत की गई।

UNRWA क्या है और इजरायल इसे क्यों निशाने पर ले रहा है?

UNRWA संयुक्त राष्ट्र की वह एजेंसी है, जो फिलीस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और सुरक्षा जैसी बुनियादी सेवाएं प्रदान करती है। यह एजेंसी गाजा पट्टी, वेस्ट बैंक, जॉर्डन, लेबनान और सीरिया में करीब 59 लाख पंजीकृत फिलीस्तीनी शरणार्थियों की मदद करती है। इजरायल लंबे समय से UNRWA पर आरोप लगाता रहा है कि यह एजेंसी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमास के प्रभाव में है और उसके कुछ कर्मचारी आतंकी गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। इजरायल का यह भी कहना है कि UNRWA शरणार्थियों को स्थायी रूप से बसाने के बजाय उनकी शरणार्थी पहचान बनाए रखता है, जिससे संघर्ष खत्म होने के बजाय और गहराता है। हालांकि UNRWA इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है और कहता है कि जब तक फिलीस्तीनी समस्या का “न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान” नहीं हो जाता, तब तक उसका मानवीय मिशन जारी रहेगा।

Jerusalem UNRWA Demolition By Israel
Jerusalem UNRWA Demolition By Israel

UN का पलटवार: अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

इस कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। UN के मुताबिक, यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का “खुलेआम और जानबूझकर उल्लंघन” है। UNRWA ने बयान जारी कर कहा कि इजरायली सेना ने सांसदों और सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री की मौजूदगी में संयुक्त राष्ट्र की संपत्ति को गिराया, जो अभूतपूर्व है। UN का दावा है कि पूर्वी यरूशलम स्थित यह परिसर अब भी संयुक्त राष्ट्र की संपत्ति था और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संरक्षण प्राप्त है। इससे पहले जब इजरायली अधिकारियों ने यहां छापा मारा था और इजरायली झंडा फहराया था, तब भी UN ने स्पष्ट किया था कि यह परिसर “पवित्र” है और किसी भी तरह के हस्तक्षेप से सुरक्षित है।

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“ऐतिहासिक दिन” क्यों बोला गया?

इस पूरी कार्रवाई के दौरान इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर खुद मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने इसे “यरूशलम में संप्रभुता स्थापित करने का ऐतिहासिक दिन” बताया। बेन-ग्विर ने कहा, “आज आतंकवाद का समर्थन करने वालों को यहां से बाहर निकाला जा रहा है। यरूशलम में ऐसे किसी भी तत्व को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” हालांकि, इस कार्रवाई के वक्त इमारत में कई फिलीस्तीनी परिवारों के रहने की खबरें भी सामने आईं, जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है।

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