ईरान का ‘महायुद्ध’ वाला ऐलान: अमेरिका-इजरायल के लिए बंद हुआ होर्मुज का रास्ता, पर भारत के लिए खुली ‘किस्मत की चाबी’!
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान की IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा ऐलान किया है। अमेरिका-इजरायल के लिए रास्ता बंद, लेकिन भारत के लिए आई बड़ी खुशखबरी। जानें क्या है पूरा मामला।
Strait of Hormuz Closure Iran News: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बीच ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), अब पश्चिमी देशों के लिए ‘नो-गो जोन’ बन चुका है। हालांकि, इस तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आई है। जहाँ पश्चिमी देशों पर पाबंदी लगी है, वहीं भारत के लिए ईरान ने अपने दरवाजे खुले रखे हैं।
होर्मुज की घेराबंदी: पश्चिमी देशों को IRGC की ‘विनाश’ वाली चेतावनी
ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के माध्यम से जारी बयान में IRGC ने बेहद सख्त लहजे में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह फैसला केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, बल्कि एक सैन्य आदेश है। IRGC ने चेतावनी दी है कि यदि इन देशों का कोई भी जहाज इस मार्ग से गुजरने की हिमाकत करता है, तो उसे तुरंत निशाना बनाया जाएगा और समुद्र में डुबो दिया जाएगा। ईरान का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत, युद्ध की स्थिति में उसे अपनी सीमाओं और जलमार्गों को नियंत्रित करने का पूरा अधिकार है। यह कठोर कदम शनिवार को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान के जवाब में उठाया गया है।

भारत और चीन के लिए ‘ग्रीन सिग्नल’: क्या है ईरान की रणनीति?
जहाँ एक तरफ पूरी दुनिया तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन टूटने से डरी हुई है, वहीं ईरान ने भारत और चीन को इस प्रतिबंध से बाहर रखकर अपनी कूटनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया है।
- चीन को मिला पहले समर्थन: बुधवार को ईरान ने साफ किया था कि चीनी ध्वज वाले जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा। इसे बीजिंग द्वारा तेहरान के प्रति दिखाए गए सहानुभूतिपूर्ण रुख के इनाम के तौर पर देखा जा रहा है।
- भारत के लिए खुशखबरी: ताजा घोषणा के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि भारत के लिए भी यह जलमार्ग खुला रहेगा। इसका मतलब है कि संकट के इस दौर में भी भारत को तेल की आपूर्ति बाधित नहीं होगी। नई दिल्ली के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत और राहत की बात है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खाड़ी देशों से आने वाला कच्चा तेल रीढ़ की हड्डी की तरह है।
वैश्विक ऊर्जा संकट: 20% समुद्री तेल परिवहन पर ‘ब्रेक’
होर्मुज जलडमरूमध्य कोई साधारण जलमार्ग नहीं है। यह दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला हर बड़ा टैंकर इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। वर्तमान स्थिति की भयावहता:
- जहाजों का जमावड़ा: मरीन ट्रैकिंग वेबसाइट्स के मुताबिक, कुवैत और दुबई के तटों पर सैकड़ों तेल टैंकर लंगर डाले खड़े हैं। वे आगे बढ़ने का जोखिम नहीं उठा पा रहे हैं।
- दुबई के व्यापार पर असर: दुनिया का 10वां सबसे बड़ा कंटेनर टर्मिनल, जेबेल अली बंदरगाह, इस नाकाबंदी के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
- ऐतिहासिक घटना: 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी टैंकरों पर हमले हुए थे, लेकिन यातायात कभी पूरी तरह ठप नहीं हुआ था। यह इतिहास में पहली बार है जब कमर्शियल जहाजों के लिए इस मार्ग को युद्ध के कारण इस तरह बंद किया गया है।



