रायबरेली में Rahul Gandhi को मिली दादा फिरोज गांधी की ऐतिहासिक धरोहर, दशकों पुराना ड्राइविंग लाइसेंस देख भावुक हुए
रायबरेली दौरे के दौरान राहुल गांधी को उनके दादा और पूर्व सांसद फिरोज गांधी का दशकों पुराना ड्राइविंग लाइसेंस भेंट किया गया। जानिए इस ऐतिहासिक पल की पूरी कहानी।
Rahul Gandhi: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के रायबरेली (Raebareli) दौरे पर आए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के लिए मंगलवार का दिन भावनाओं और यादों से भरा रहा। इस दौरे के दौरान उन्हें एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर सौंपी गई, जो न केवल गांधी परिवार बल्कि भारतीय राजनीतिक इतिहास से भी जुड़ी हुई है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को उनके दादा और पूर्व सांसद फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) का दशकों पुराना ड्राइविंग लाइसेंस भेंट किया गया, जिसे देखकर वे काफी भावुक नजर आए। यह दुर्लभ दस्तावेज वर्षों तक गुमनाम रहा और अब सामने आकर एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना।
वर्षों से संभालकर रखी गई थी गांधी परिवार की यह धरोहर
यह ऐतिहासिक ड्राइविंग लाइसेंस रायबरेली (Raebareli) प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को सौंपा गया। आयोजन समिति के सदस्य विकास सिंह (Vikas Singh) ने मंच पर राहुल गांधी को यह दस्तावेज भेंट किया। विकास सिंह (Vikas Singh) ने बताया कि यह ड्राइविंग लाइसेंस उन्हें उनके ससुर को कई साल पहले एक कार्यक्रम के दौरान मिला था। उस समय शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि यह कागज़ का टुकड़ा इतिहास की इतनी बड़ी धरोहर है। उनके ससुर के निधन के बाद, विकास सिंह (Vikas Singh) की सास ने इसे बेहद सावधानी और श्रद्धा के साथ एक अमानत की तरह संभालकर रखा। विकास सिंह (Vikas Singh) ने कहा, “हमें लगा कि यह सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि गांधी परिवार की विरासत है। राहुल जी जब रायबरेली आए, तो इसे उन्हें सौंपना हमारा नैतिक कर्तव्य था।”

राहुल गांधी(Rahul Gandhi) हुए भावुक, तुरंत सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को भेजी तस्वीर
जैसे ही राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के हाथों में उनके दादा फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) का ड्राइविंग लाइसेंस पहुंचा, वे कुछ पल के लिए उसे ध्यान से देखते रहे। उनके चेहरे पर भावुकता साफ झलक रही थी। यह सिर्फ एक पुराना लाइसेंस नहीं था, बल्कि उनके परिवार, संघर्ष और राजनीतिक विरासत की यादों का प्रतीक था। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने तुरंत अपने मोबाइल फोन से उस ड्राइविंग लाइसेंस की तस्वीर खींची और व्हाट्सऐप के माध्यम से अपनी मां और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को भेज दी। मंच पर मौजूद लोग भी इस भावनात्मक पल के साक्षी बने। यह क्षण दर्शाता है कि राजनीति से परे भी राहुल गांधी अपने पारिवारिक इतिहास और मूल्यों से गहराई से जुड़े हुए हैं।
फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) और रायबरेली (Raebareli) का ऐतिहासिक रिश्ता
फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) का जन्म दिसंबर 1912 में हुआ था। वे भारत की स्वतंत्रता के बाद उभरे उन नेताओं में से थे जिन्होंने संसद के भीतर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाई। वर्ष 1952 में हुए भारत के पहले आम चुनाव में फिरोज गांधी ने रायबरेली लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया था। रायबरेली (Raebareli) केवल एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि गांधी परिवार की राजनीतिक और भावनात्मक विरासत का केंद्र रहा है। फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) के बाद सोनिया गांधी और अब राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। यह सीट कांग्रेस पार्टी की पहचान और परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। 7 सितंबर 1960 को फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) का निधन हो गया था, लेकिन उनके विचार और योगदान आज भी भारतीय राजनीति में प्रासंगिक हैं।
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ऐतिहासिक दस्तावेजों का भावनात्मक महत्व
आज के डिजिटल युग में ऐसे दस्तावेजों का मिलना दुर्लभ है। फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) का ड्राइविंग लाइसेंस न केवल उनके निजी जीवन की झलक देता है, बल्कि उस दौर की प्रशासनिक और सामाजिक संरचना को भी दर्शाता है। ऐसे दस्तावेज इतिहास को जीवंत बना देते हैं और नई पीढ़ी को अपने अतीत से जोड़ते हैं। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को यह धरोहर मिलना केवल एक व्यक्तिगत क्षण नहीं, बल्कि रायबरेली (Raebareli) और कांग्रेस समर्थकों के लिए भी गर्व का विषय बन गया है।



