खौफनाक या फर्जी? दिल्ली में 807 किडनैपिंग की खबर का ‘मर्दानी 3’ से क्या है कनेक्शन, जानें पूरा सच!

क्या दिल्ली में 807 लोगों के अपहरण की खबर रानी मुखर्जी की फिल्म 'मर्दानी 3' का पीआर स्टंट है? जानें दिल्ली पुलिस और यशराज फिल्म्स के बयानों के पीछे का पूरा सच।

Mardaani 3 PR Campaign: राजधानी दिल्ली (Delhi) में अपराध की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर एक ऐसी खबर तैर रही है जिसने हर माता-पिता की रातों की नींद उड़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि दिल्ली में मात्र 15 दिनों के भीतर 807 लोगों का अपहरण हो गया। जैसे ही यह आंकड़ा वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर डर का माहौल बन गया। लेकिन ट्विस्ट तब आया जब इस सनसनीखेज खबर के पीछे रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ के पीआर कैंपेन (Mardaani 3 PR Campaign) होने के आरोप लगने लगे। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह पूरा माजरा क्या है और यशराज फिल्म्स (YRF) ने इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई दी है।

सनसनीखेज आंकड़े: क्या वाकई दिल्ली में गायब हुए 807 लोग?

इस विवाद की जड़ 30 जनवरी को आई एक मीडिया रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि 1 से 15 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ किडनैपिंग हुई। आंकड़ों के मुताबिक, इन 15 दिनों में 807 लोग गायब हुए, जिसमें 191 बच्चे और 509 महिलाएं शामिल थीं। यानी औसतन हर रोज 54 लोग लापता हो रहे थे। जैसे ही ये आंकड़े पब्लिक डोमेन में आए, दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और जॉइंट कमिश्नर संजय त्यागी ने एक आधिकारिक वीडियो संदेश जारी कर इन आंकड़ों को सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस साल गुमशुदगी के मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, बल्कि कमी दर्ज की गई है।

Mardaani 3 PR Campaign
Mardaani 3 PR Campaign

‘मर्दानी 3’ और पेड प्रमोशन का विवाद: क्यों उठ रही हैं उंगलियां?

सवाल यह उठता है कि एक क्राइम रिपोर्ट का संबंध बॉलीवुड फिल्म से कैसे जुड़ गया? दरअसल, रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ 30 जनवरी को ही सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। संयोग देखिए कि फिल्म की कहानी भी चाइल्ड ट्रैफिकिंग और किडनैपिंग जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आधारित है। सोशल मीडिया पर इन्फ्लूएंसर्स और यूजर्स ने यह दावा करना शुरू कर दिया कि फिल्म को हाइप देने के लिए जानबूझकर शहर में डर का माहौल बनाया गया। दिल्ली पुलिस ने भी अपने एक बयान में संकेत दिया कि “लापता लोगों की संख्या को लेकर जो डर फैलाया जा रहा है, वह असल में एक पेड पीआर कैंपेन (Paid PR Campaign) का हिस्सा है।” पुलिस ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि मुनाफे के लिए दहशत फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यशराज फिल्म्स (YRF) का पलटवार: ‘ईमानदारी हमारी नींव है’

जब आरोपों की बौछार यशराज फिल्म्स पर होने लगी, तो प्रोडक्शन हाउस ने अपनी चुप्पी तोड़ी। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, YRF ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। कंपनी का कहना है: “यशराज फिल्म्स एक 50 साल पुरानी प्रतिष्ठित संस्था है, जिसकी नींव पारदर्शिता और ईमानदारी पर टिकी है। हम उन सभी दावों को खारिज करते हैं जिनमें कहा जा रहा है कि ‘मर्दानी 3’ के प्रमोशन के लिए किसी मुद्दे को सनसनीखेज बनाया गया। हमें जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा है कि सच जल्द ही सामने आएगा।”

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विवाद के तीन अनसुलझे सवाल:

  • डाटा का स्रोत क्या है? यदि दिल्ली पुलिस इन आंकड़ों को गलत बता रही है, तो न्यूज़ एजेंसी PTI के पास यह ‘ऑफिशियल डाटा’ कहाँ से आया?
  • पुलिस का विरोधाभास: एक तरफ पुलिस 807 के आंकड़े को गलत बता रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ पुरानी रिपोर्ट्स को शेयर कर रही है जो कहती हैं कि हर महीने करीब 2 हजार लोग लापता होते हैं।
  • एक्शन कब होगा? अगर यह वाकई एक पेड कैंपेन था, तो पुलिस उन लोगों या एजेंसियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कब करेगी जिन्होंने दहशत फैलाई?

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